हजरत उमर(रजी अल्लाह तआला ) से रिवायत है कि नबी करीम(सलल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने इर्शाद फ़रमाया: ख़त्ताबके बेटे! जाओ, लोगों में यह एलान कर दो कि जन्नत में सिर्फ ईमान वाले ही दाख़िल होंगे।
।(मुस्लिम)
हजरत अबू लैला (रजी अल्लाह तआला) से रिवायत है कि नबी करीम(सलल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने (अबू सुफ़यान से) इर्शाद फ़रमाया: अबू सुफ़यान! तुम्हारी हालत पर अफ़सोस है। मैं तो तुम्हारे पास व आख़िरत (की भलाई) ले कर आया हूं। तुम इस्लाम कुबूल कर लो,सलामती में आ जाओगे। (तबरानी, मज्मउज्ज़वाइद् )
हजरत अनस(रजी अल्लाह तआला) फ़रमाते हैं कि मैंने नबी करीम(सलल्लाहू अलैहि वसल्लम) को यह इर्शाद फ़रमाते हुए सुना : जब क़ियामत का दिन होगा तो मुझे शफ़ाअत की इजाजत दी जाएगी। मैं अर्ज करूंगा: ऐ मेरे रब! जन्नत में हर उस शख़्स को दाख़िल फ़रमा दीजिए, जिसके दिल में राई के दाने के बराबर भी (ईमान) हो, (अल्लाह तआला मेरी इस शफ़ाअत को कुबूल फ़रमा लेंगे) और वे लोग जन्नत में दाखिल हो जाएंगे। फिर मैं अर्ज करूंगा, जन्नत में हर उस शख्स को दाखिल फ़रमा दीजिए, जिसके दिल में जरा-सा भी (ईमान) हो। (बुखारी)
हजरत अबू सईद खुदरी(रजी अल्लाह तआला) से रिवायत है कि नबी करीम(सलल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने इर्शाद फ़रमाया: जब जन्नती जन्नत में और दौज़ख़ी दौजख़ में दाखिल हो चुके होंगे, तो अल्लाह तआला इर्शाद फ़रमाएगें जिसके दिल में राई के दाना के बराबर भी ईमान हो, उसे भी दोजख़ से निकाल लो, चुनांचे उन लोगों को भी निकाल लिया जएगा। उनकी हालत यह होगी कि वह जल कर स्याह फ़ाम हो गए होंगे। उसके बाद उनको नहरे हयात में डाला जाएगा तो वह उस तरह (फ़ौरी तौर पर तर व ताज़ा होकर)निकल आएंगे जैसे दाना सैलाब के कूड़े में (पानी और खाद मिलने की वजह से फ़ौरी) उग आता है। कभी तुम ने ग़ौर किया है कि वह कैसा जर्द बल खाया हुआ निकलता है? (बुखारी)
हज़रत अबू उमामा(रजी अल्लाह तआला)
से रिवायत है कि एक शख़्स ने रसूलुल्लाह (सलल्लाहू अलैहि वसल्लम )से सवाल किया कि ईमान क्या है? आप( सलल्लाहू अलैहि वसल्लम)ने इर्शाद फ़रमाया: जब तुम को अपने अच्छे अमल से खुशी हो और अपने बुरे काम पर रंज हो, तो तुम मोमिन हो । (मुस्तदरक हाकिम)
हजरत अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब(रजी अल्लाह तआला) से रिवायत है कि उन्होंने रसूलुल्लाह(सलल्लाहू अलैहि वसल्लम) को यह इर्शाद फ़रमाते हुए सुना ईमान का मजा उसने चखा (और ईमान की लज्ज़त उसे मिली) जो अल्लाह तआला को रब, इस्लाम को दीन और मुहम्मद (सलल्लाहू अलैहि वसल्लम) को रसूल मानने पर राजी हो जाए। (मुस्लिम)
फायदा : मतलब यह है कि अल्लाह तआला की बन्दगी और इस्लाम के मुताबिक़ अमल और हजरत मुहम्मद की इताअत, अल्लाह तआला और उनके रसूल(सलल्लाहू अलैहि वसल्लम) और इस्लाम की मुहब्बत के साथ हो जिसको यह बात नसीब हो गई, यक़ीनन ईमानी लज्जत में भी उसका हिस्सा हो गया।
हजरत अनस(रजी अल्लाह तआला) रिवायत करते हैं कि रसूलुल्लाह(सलल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने इर्शाद फ़रमाया : ईमान की हलावत उसी को नसीब होगी, जिसमें तीन बातें पाई जाएंगी। एक यह कि अल्लाह तआला और उसके रसूल की मुहब्बत उसके दिल में सबसे ज़्यादा हो । दूसरे यह कि जिस शख़्स से भी मुहब्बत हो सिर्फ अल्लाह तआला ही के लिए हो। तीसरे यह कि ईमान के बाद कुफ़ की तरफ़ पलटने से उसको इतनी नफ़रत और ऐसी अजीयत हो, जैसी कि आग में डाले जाने से होती है । (बुख़ारी)
हजरत अबू उमामा (रजी अल्लाह तआला) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सलल्लाहू अलैहि वसल्लम)ने इर्शाद फ़रमाया: जिस शख़्स ने अल्लाह तआला ही के लिए किसी से मुहब्बत की और उसी के लिए दुश्मनी की और (जिसको दिया) अल्लाह तआला ही के लिए दिया और (जिसको नहीं दिया ) अल्लाह तआला ही के लिए नहीं दिया तो उसने ईमान की तकमील कर ली।(अबूदाऊद)
