उम्मुल मुमेनीन हजरत खदीजा (R Z) मक्के के एक मोआजिज उम्मुल मुमनीन हजरत खदीजा (R Z) हिंदी में एक प्यारी हदीश
दौलत मंद ताजिर खवीलद की बेवा बेटी थीं
वा बहोत नेक और खुश अखलख खातून थी लोग उनकी अच्छी आदतों की वजह से उन्हें ताहिरा कहते थे वालिद के इंतकाल के बाद बीबी खदीजा उनका कारोबार खुद चलाने लगे उन्हे एक ऐसे दयानत दार और काबिल एतमाद मदद गार की तलाश थी जो उनके तिजारती कारोबार को अच्छे ढंग से चला सके।
बीबी खदीजा (R Z) को जब ये मालूम हुआ कि हजरत मोहम्मद (S W) बहोत सच्चे और दयानत दार नौजवान है और तिजारत का तजुर्बा भी रखते है तो उन्हे बड़ी खुशी हुई। उन्होंने आप (S W) से कहा कि आप मेरा समाने तिजारत दूसरे मुल्को में बेच आया करे।
जितना मुआवजा मैं दूसरो को देती हूं उस से ज्यादा आप को दूंगी।
हजरत मोहम्मद (S W) ने हामी भरली और मोआमला तै हो गया
बीबी खदीजा (R Z) की इस से बड़ी खुश नसीबी और क्या हो सकती थी कि एक आमीन व सादिक आदमी उन का तिजारती सामान दूसरे मुल्कों में बेचने के लिए ले जाए।
जब तिजारती काफिला शाम के लिए रवाना हुआ तो बीबी खदीजा (R Z) ने अपने एक गुलाम मैसरा को भी हजरत मोहम्मद (S W)
के साथ कर दिया। मैसरा ने देखा कि आप (S W) अपने हम राहियों के साथ बड़ी खुश इखलाकी से पेश आते हैं। किसी से सख्त लहजे में बात नहीं करते। तमाम काफिले वालो के साथ शराफत और हमदर्दी का बरताओ करते है। सबसे ज्यादा तअज्जूब
मैसरा को इस बात पर हुआ कि उसे गुलाम समझने के बजाए आप (S W) उस के साथ भाइयों जैसा सुलूक करते हैं।
जब तिजारती काफिला लौट कर मक्के आया तो मालूम हुआ कि
इस मर्तबा माले तिजारत में दुगना मुनाफा हुआ है मैसरा ने हजरत मोहम्मद (S W) कि शराफत और ईमानदारी की बहोत तारीफ की जिस से बीबी खदीजा इतनी खुश हुए कि खुद शादी का पैगाम
भेजवाया जैसे आप (S W) ने अपने चचा अबू तालिब के मशवरे से कुबूल फरमा लिया और इस तरह बीबी खदीजा का निकाह हजरत मोहम्मद (S W) से हो गया। निकाह के वकत हुजूर
(S W) कि उम्र पच्चीस साल थी और हजरत खदीजा (R Z)
चालीस साल कि थीं।।
शादी के पन्द्रह साल बाद अल्लाह ने हुजूर (S W) को नबी बनाया
बीबी खदीजा सब से पहले आप (S W) पर ईमान लाए।
बीबी खदीजा (R Z) प्यारे नबी (S W) को बहोत चाहती थीं तन मन धन से आप की खिदमत में लगी रहती थी । जब काफिर लोग
प्यारे नबी (S W) का कहना ना मानते आप (S W) को सताते और तकलीफे देते तो बीबी खदीजा (R Z) आप (S W) को तसल्ली देते और ऐसी बातें करते जिससे आप (S W) का गम दूर हो जाता दीन इस्लाम को फैलाने में बीबी खदीजा (R Z) ने प्यारे नबी (S W) कि बड़ी मदद की और रफ्ता रफ्ता अपनी सारी दौलत इसी काम पर लगा दी।
पैसठ साल कि उम्र में बीबी खदीजा का इंतकाल हुआ। उन की वफात से प्यारे नबी (S W) को बहोत सदमा पहुंचा।
आप (S W) जिन्दगी भर इज्जत और मोहब्बत से उन को याद करते और उन की बाते करते रहे ।
एक बार प्यारे नबी (S w) ने उम्मूल मुमेनिन हजरत खदीजा
(R Z) की तारीफ करते हुए फरमाया ।
मुझे खदीजा (R Z) से अच्छी बेहतर और मेहरबान बीवी नहीं मिली खदीजा (R Z) मुझ पर उस वकत ईमान लाए और उन्होंने उस वकत मेरी रिसालत की गवाही दी। जब लोग मुझे झुटलाते और मेरा मजाक उड़ाते थे उन्होंने ने उस वकत मेरी मदद की जब मुझे सहारे की जरूरत थी जब मेरे पास कुछ ना था तो उन्होंने मालो दौलत से मेरी मदद की ।
एक मौके पर प्यारे नबी (S W) ने फरमाया ।
खदीजा (R Z) उम्मत की सबसे अच्छी खातून हैं।
प्यारे नबी (S W) से हजरत खदीजा (R Z) की छे औलादे हुए।
दो बेटे और चार बेटियां बेटो के नाम कासिम (R Z) और अब्दुल्लाह (R Z) थे दोनो का बचपन ही में इंतेकाल हो गया था ।
हजरत जैनब (R Z) हजरत रूकैया (R Z) हजरत उम्मे कुलशुम और हजरत फातिमा जहरा (R Z) बेटियां थी।
अल्लाह की हजारों रहमते हों उम्मुल मुमेनिन हजरत खदीजा
(R Z) और उनकी पाक बाज औलाद पर ।।।।।।
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