पहले ज़माने में सफर करना बहोत दुस्वार था लोग जानवरों की पीठ पर सवार हो कर सफर करते थे । सवारी मिलती तो पैदल ही चलना पढ़ता था । रास्ते में लूट मार का भी खतरा रहता था। इस लिए लोग काफिले की शक्ल में सफर किया करते थे। इसी ज़माने की बात है। एक काफिला जिलान से बगदाद जा रहा था।उस काफिले के साथ एक लड़का भी था। दीन का इल्म हासिल करने के शौक में उसे इस सफर पर आमादा किया था ।
सफर पर रवाना होने से पहले उस की मां ने चालीस अशरफी उसके लिबास में इस तरह सी दी कि वो बगल मे छिप गई।
चलते वकत मां ने कहा बेटे कैसी ही मुसीबत पड़े चाहे जान पर बन जाए । लेकिन कभी झूठ न बोलना हमेशा सच बोलना सच बोलने वाले को अल्लाह पसंद करता है ।
काफिला जिरान से चला और रेगिस्तान से गुजरते हुए एक
नखलिस्तान में ठैरा। वहा खजूरो के झुंड थे साफ पानी का चश्मा
था ऊंटो के कजावे खोल दिए गए है ।
लोगो ने अपने हथियार रख दिए बूढ़े कमर सीधी करने लगे ।
नौजवान लकड़ियां जमा करने करने लगे । और दूसरे कामों के लिए इधर उधर फैल गए । औरतों ने चूल्हे संभाल लिए बच्चे वाले खेल कूद में लग गए । अचानक डाकुओं ने धावा बोल दिया काफिले वाले चौकन्ने न थे । डाकुओं ने उन्हें घेर लिया और
लूट मार शुरू करदी । एक डाकू ने उस लकड़े को भी पकड़ा और पूछा लड़के तेरे पास कुछ है ।।?
लड़के ने जवाब दिया हां मेरे पास चालीस अशरफियां है डाकू ने तलाशी ली अशरफियां न मिले। समझा की लड़का मजाक कर रहा है । वह आगे बढ़ गया एक और डाकू लड़के के पास से गुजरा उस ने भी पूछा मियां लड़के तुम्हारे पास क्या है ? लड़के ने फिर वही जवाब दिया कि मेरे पास चालीस अशरफियां है उस डाकू ने भी टटोल कर देखा अशरफियां उसके हाथ भी न लगे तंग आकर वह उसे अपने सरदार के पास ले गया और सारा माजरा कह सुनाया ।
सरदार ने लड़के को करीब बुलाया और पूछा साहब जादे तुम्हारे पास क्या है ।।?
लड़के ने बड़े इत्मीनान से वही जवाब दिया मेरे पास चालीस अशरफियां है सरदार ने पूछा कहा है ?
लड़के ने बताया मेरे लिबास में बगल के नीचे सिली हुई है ।
सिलाई उधेड़ी गई तो अशरफियां छन छन गिर पड़े ।
सरदार और तमाम डाकू दंग रह गए हैरत से लड़के का मुंह तकने लगे सरदार ने कहा तुम भी अजीब लड़के हो ।
क्या तुम जानते ना थे कि या अशरफियां हम छीन लेंगे ?
क्या तुम्हे इनकी जरूरत नहीं ?
लड़का बड़े सुकून से बोला जरूरत क्यों नहीं मै दीन का इल्म हासिल करने बगदाद जा रहा हूं अशरफियां न रहेंगे तो मुझे बहोत
दुशवारी होगी लेकिन मैं झूठ कैसे बोल सकता था ।
सरदार कहने लगा : झूठ बोल देते तो तुम्हारी अशरफियां बच जाते। लड़के ने कहा : या तो ठीक है लेकिन अल्लाह का हुक्म है ।
सच बोलो मेरी अम्मी ने भी चलते वकत मुझे नसीहत कि थी कि झूठ कभी न बोलना कैसी ही आफत पड़े सच ही बोलना ।
मैं प्यारी अम्मी की या नसीहत कभी न भूलूंगा ।
लड़के की हिम्मत सच्चाई और फरमा बरदारी का सरदार के दिल पर बहोत असर पड़ा उस ने अपने दिल में सोचा इस लड़के को अपनी मां की नसीहत का इतना खयाल है और एक मै हूं।
कि अल्लाह और उसके रसूल (S W) के हुक्म के खिलाफ डाके मारता फिरता हूं। और अल्लाह की मखलूक को परेशान करता हूं
सरदार का सर निदामत से झुक गया आखों से आंसू बहने लगे ।
उस ने लड़के के हाथ पर अच्छा मुसलमान बन कर जिन्दगी गुजरने का अहद किया अपने तमाम गुनाहों से तौबा की । दूसरे डाकुओं
ने भी तौबा की काफिले वालो से माफी मांगी और लूटा हुवा कुल सामान उन्हे वापस कर दिया तमाम डाकू अच्छे और नेक मुसलमान बन गए ।
उस लड़के का नाम अब्दुल कादिर था । अब्दुल कादिर पढ़ लिख कर बहोत बड़े आलिम हुए। इस्लाम को खूब फैलाया वह शेख मुहिद्दीन अब्दुल कादिर जिलानी ( R H ) के नाम से मशहूर हैं
उन को बड़े पीर साहब भी कहा जाता है । ????,
तो मेरे प्यारे दोस्तो इस लिए कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए चाहे जितना भी बड़ा मुसीबत आ जाए । और भी ऐसी प्यारी हदीश जानने के लिए हमे फॉलो जरूर करे
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