जब उसे फ़ीफ़ा अवार्ड हुआ तो लोगों ने खूब एलिगेशन लगाये की कतर के पास स्टेडियम तो छोड़ो , जिस स्टेडियम में फाइनल होना है वो शहर ही नहीं था
अल्लाह का लाख शुक्र है दस सालों में फ़ीफ़ा के तमाम प्रोजेक्ट का हिस्सा रहा , ज़ाहा हदीद के बनाए वकरा स्टेटडियम हो या मिना शहर , लुसैल शहर या सुप्रीम कमेटी के प्रोजैक्ट्स या हमद का एयरपोर्ट
सच बताऊँ तो ये सब इम्पॉसिबल था मगर इण्डियन पाकिस्तानी नेपाली फ़िलिपीनो बंगलादेशी और तमाम मुल्कों के मेहनत कश लोगों ने अपना खून पसीना देके इसे मुकम्मल किया
लूसैल नाम का शहर सिर्फ़ रेगिस्तान था , और आज के वक़्त में वो स्मार्ट सिटी बन चुका है और लुसैल स्टेडियम हो ,HIA एयरपोर्ट हो या बाक़ी नए बने स्टेडियम सब सिर्फ़ इंजीनियरिंग ही नहीं स्टेट ऑफ़ आर्ट बन के उभरे हैं
2 hundred बिलियन इसी वजह से लगे असल पैसा इंफ़्रास्ट्रक्चर पे लगा (स्टेचू भी बनवा सकते थे) इक नया शहर आबाद किया , जो पुराना दोहा था उसे ऐसा सजाया की पूछिये मत , जो स्टेडियम बने हैं वो मिसाल है और उनमे से दो फ़ीफ़ा बाद डोनेट कर दिये जाएँगे (पोर्टेबल हैं दोनों अल बैत और 974) 974 box लगाके पूरा स्टेडियम बना दिया
बाक़ी शराब और एलजीबीटी वाली नौटंकी है बस , क्योंकि आप मेहमान हैं तो आपको मेज़बान के घर के आदाब तो मानने पड़ेंगे , जैसे हिंदुस्तान में रहना है तो गोडसे मुर्दाबाद कहना है वैसे ही समझिये
पूरे मुल्क का ट्रांसपोर्ट मुफ़्त कर रखा है घर ले लोगे किसी का ?और औरतों के कपड़े वाला जो मौजू है वो हर माल पे लिखा था की मॉडेस्ट कपड़े पहने और कल्चर का सम्मान करें (घूँघट प्रथा नहीं है बस बिकनी नहीं पहन सकते पब्लिक प्लेस पे )
शराब शुरू से बंद है जिसे पीने का शौक़ है वो लाइसेंस ले लेते हैं क़तर में , उनका कोटा रहता है की इक कार्ड पे इतने बोतल मिलेगा और घर में बैठ के पियो ( हर किसी को मिलता भी नहीं - नॉन मुस्लिम होना चाहिए , अच्छा प्रोफेशन और सैलरी )
जब तमाम मुल्कों ने उसे बैन कर दिया था उसके बावजूद आज कतर का हुस्न ए सलूक उन मुल्कों के साथ अच्छा है पीस की बात करने वाला दुनिया के सबसे सुरक्षित मुल्कों में से इक है
और पैसा बहुत है उस मुल्क के पास , वो दुनिया से इस्लामोफ़ोबिया ख़त्म करने के लिए ये इवेंट करवा रहा है ताकि परसेप्शन बदले मिडल ईस्ट नया यूरोप है मगर तमीज़दार और तारीकेदार और कतर इक लीडर है (अफ़ग़ान और अमेरिका के मसले में मीडिएटर था ) क्षेत्रफल में छोटा है औक़ात में कहीं बड़ा है और इक इंसाफ़ पसंद बादशाह शेख तमीम की पनाह में है जहां लोगों के साथ हक़तल्फ़ी नहीं होती
हबीबी khus aama did to Qatar


